Thursday, 14 September 2017

ढूंढ लेगा वो

 आँखे तुम्हारी कुछ मुस्कान छिपाये बैठी है,
नज़रें झुका लो, तो भी ढूंढ लेगा वो!(कोई)

मासूम चेहरा कोई नाम छिपाये बैठी है,
इनको हटा लो, तो भी ढूंढ लेगा वो!(कोई)

ज़ुल्फें ये कोई शाम बनाये बैठी है,
थोड़ी लहरा लो, तो भी इनमें छांव ढूंढ लेगा वो!(कोई)

साँसें तेरी कोई 'ज़ाम' चढ़ाये बैठी है,
तुम कुछ पल न् भी लो, तो भी ढूंढ लेगा वो!(कोई)

___©aksh!

_©akshwrite.blogspot.com

यादें

जितना सहेजुं यादों को में अपनी किसी उम्र की, तो बस यादें रहने लगी है.. वो जो हमसफ़र था कहीं दूर खोता जा रहा है...