Friday, 24 June 2016
Friday, 17 June 2016
A Letter From Crying Boy
“ If a guy weeps for you and he can’t show you, he can’t say to you but he once wants to talk you, then don’t postpone the time of talking him. He dies. Believe me, he is deeply broken, deeply sad, deeply mad, yet he doesn’t want your intention everytime or showy intention, but he wants only your voice, only your words, only your companion, not for whole of the time, but for a little bit, only for once give him totally of yourself. Trust, he’ll not harm you but he need only your surrounding, your hand on his head which really heals him. Yes! It heals him & he becomes alive.
If you want to see his weeping, ask him about ‘have you wept for me?’ and watch his eyes, he can’t stop the flow of his tears that time. Yes, he is sentimental but not a fake One...”
~©Aksh...
If you want to see his weeping, ask him about ‘have you wept for me?’ and watch his eyes, he can’t stop the flow of his tears that time. Yes, he is sentimental but not a fake One...”
~©Aksh...
ऐ 'अक्श'
इस दफा फिर कर डाली जो मुहब्बत,
तो भी अनजान से लगते हैं..
जब टुटा था दिल पिछली दफा,
लोगों ने कहा विरान से लगते हैं..
नाजिल होती है मुहब्बत हर वक्त मेरे रुह तले,
सुनसान सी धड़कन में सरगम की जान से लगते हैं..
हुआ न मुकम्मल ईमान जो मेरा तो गम भी नहीं,
भीड़ से दूर खड़े एक इंसान से लगते हैं..
मयखाने में जिंदे भी हो जाते है मुर्दे,
और मुर्दों में हर सख्श एक समान से लगते हैं..
खामखा तोड़ डाली है रितों ने हमारी चाहतें,
ग़र दिल न हो मुहब्बत में तो बेईमान से लगते हैं..
होती हैं आह जो चुभती हैं बातें उसकी,
कह देती हैं खुलकर वो कि सुबह के साये में डुबते शाम से लगते हैं..
कहीं खो न जाये राह-ए-जिंदगी,
ढुँढोगे कितना ऐ ‘ अक्श ”, एक पल की मुहब्बत के लिए पुरे दिन परेशाँ से लगते हैं... :( :(
>>>>>>>>>
((नाजिल-way , मुकम्मल -approve,
रुह-soul))
>>>>>>>>>
By ♥~Aksh...
तो भी अनजान से लगते हैं..
जब टुटा था दिल पिछली दफा,
लोगों ने कहा विरान से लगते हैं..
नाजिल होती है मुहब्बत हर वक्त मेरे रुह तले,
सुनसान सी धड़कन में सरगम की जान से लगते हैं..
हुआ न मुकम्मल ईमान जो मेरा तो गम भी नहीं,
भीड़ से दूर खड़े एक इंसान से लगते हैं..
मयखाने में जिंदे भी हो जाते है मुर्दे,
और मुर्दों में हर सख्श एक समान से लगते हैं..
खामखा तोड़ डाली है रितों ने हमारी चाहतें,
ग़र दिल न हो मुहब्बत में तो बेईमान से लगते हैं..
होती हैं आह जो चुभती हैं बातें उसकी,
कह देती हैं खुलकर वो कि सुबह के साये में डुबते शाम से लगते हैं..
कहीं खो न जाये राह-ए-जिंदगी,
ढुँढोगे कितना ऐ ‘ अक्श ”, एक पल की मुहब्बत के लिए पुरे दिन परेशाँ से लगते हैं... :( :(
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((नाजिल-way , मुकम्मल -approve,
रुह-soul))
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By ♥~Aksh...
Yours Truly,
A.
दिल आ गया
देख कि तुझपे दिल आ गया...
इन लम्हों में धुन छा गया...
यूँ ही तुम कुछ अपने से लगने लगे...
सुबह शाम दिन ढलने लगे...
कुछ याद मे तेरी, कुछ बात मे तेरी...
इन धड़कनों मे तुम धड़कने जो लगे...
मैं था तन्हा , कोई सुकून आ गया...
तुमसे मिला तो जुनून आ गया...
बहका रहुं मैं , बिखरा रहुं मैं,
इन बादलों मे तु छा गया..
अब जो बारिश होंने लगी है,
रब से सिफारिश होने लगी है...
मुझको भींगा दे कुछ इस तरह से,
तु रूह मे आकर मे बसने लगी है...
तुमसे मिला तो कुछ हो सा गया...
देख कि तुझपे दिल आ गया ..☺
©~Aksh...
Yours Truly, A.
इन लम्हों में धुन छा गया...
यूँ ही तुम कुछ अपने से लगने लगे...
सुबह शाम दिन ढलने लगे...
कुछ याद मे तेरी, कुछ बात मे तेरी...
इन धड़कनों मे तुम धड़कने जो लगे...
मैं था तन्हा , कोई सुकून आ गया...
तुमसे मिला तो जुनून आ गया...
बहका रहुं मैं , बिखरा रहुं मैं,
इन बादलों मे तु छा गया..
अब जो बारिश होंने लगी है,
रब से सिफारिश होने लगी है...
मुझको भींगा दे कुछ इस तरह से,
तु रूह मे आकर मे बसने लगी है...
तुमसे मिला तो कुछ हो सा गया...
देख कि तुझपे दिल आ गया ..☺
©~Aksh...
Yours Truly, A.
पिछली बरसात
पिछली बरसात मे बादल के तीखी आवाज से जो गलती से हाथ पकड़ा था तुमने,
कमान सी भौहें तेरी इसकदर झुकी,
कुछ यूँ कातिलाना कि दिल को खुरेद गयी,
जैसे बंजर रेगिस्तान मे एक मरहूम प्यासे को बारिश की हज़ारो बूँदें इक जान से भर जाती हैं,
वो अक्श तेरी रूह की जो मरहुमियत बनकर सारे शिकवों का कत्ल कर गयी,
कुछ ऐसी बरसात मे फिर भींगा दो मुझे,
कुछ ऐसे एहसान कुछ इस तरह फिर जता दो मुझे...
©#~aksh
(इन रोमांटिक मूड)
कमान सी भौहें तेरी इसकदर झुकी,
कुछ यूँ कातिलाना कि दिल को खुरेद गयी,
जैसे बंजर रेगिस्तान मे एक मरहूम प्यासे को बारिश की हज़ारो बूँदें इक जान से भर जाती हैं,
वो अक्श तेरी रूह की जो मरहुमियत बनकर सारे शिकवों का कत्ल कर गयी,
कुछ ऐसी बरसात मे फिर भींगा दो मुझे,
कुछ ऐसे एहसान कुछ इस तरह फिर जता दो मुझे...
©#~aksh
(इन रोमांटिक मूड)
चलो वो बात कर दो
है जो कहानी आँखों ने लिख दी,
चलो वो बात कर दो..
होठों से कह दो अभी अभी,
इस मौसम मे भींगी बरसात कर दो..
गुजरी है ठहरकर जो कानो को सरगम,
ऐसे एहसास मे कुछ लम्हे साथ कर दो..
महकी जो हवाएं गालों को छूकर,
जादू से ऐसी लम्बी थोड़ी रात कर दो..
है जो कहानी आंखो ने लिख दी,
चलो वो बात कर दो...
©~#aksh..
चलो वो बात कर दो..
होठों से कह दो अभी अभी,
इस मौसम मे भींगी बरसात कर दो..
गुजरी है ठहरकर जो कानो को सरगम,
ऐसे एहसास मे कुछ लम्हे साथ कर दो..
महकी जो हवाएं गालों को छूकर,
जादू से ऐसी लम्बी थोड़ी रात कर दो..
है जो कहानी आंखो ने लिख दी,
चलो वो बात कर दो...
©~#aksh..
When Noone is with me,
I see you,
In this scene.
Yours Truly, A.
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यादें
जितना सहेजुं यादों को में अपनी किसी उम्र की, तो बस यादें रहने लगी है.. वो जो हमसफ़र था कहीं दूर खोता जा रहा है...
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“ If a guy weeps for you and he can’t show you, he can’t say to you but he once wants to talk you, then don’t postpone the time of talking ...





