Tuesday, 20 June 2017

बारिश

                    ये शाम  ये सुबह कोई इशारा कर रहा..
                    बूंदें बारिश की छुकर गुज़रती है जैसे ,
                       लहरों को कोई किनारा कर  रहा ..
                          इक अरसे सुकून ढूंढा है मैंने,
                              कुछ बयाँ कर न पाऊं,
                           दिल ये कैसे गुजारा कर रहा ...
                         सावन की घटाएं, गहरी हवाएं 
                                 आती है जैसे..
                    मौसम की बारिश, बारिश की अदाएं
                                छाती है जैसे..
                 दिल की धड़कनो को मचलने का मन
                                दुबारा कर रहा..
                बिन कहे बिन सुने किसी की बातें,
                          नई उमंगो को छूने को,
                    मुझको ये बारिश बेसहारा कर रहा..
                  बूंदें बारिश की छूकर गुज़रती है जैसे,
                      लहरों को कोई किनारा कर रहा...

                                      #~aksh...


Rain AND Love
Source : Google

Thursday, 8 June 2017

एक दिन

एक दिन सब खो जायेगा.. वो सवेरा न् जाने कैसा होगा, दुनिया न् जाने कैसी होगी, हर कुछ बदल जायेगा, यक़ीनन!
तो उस दिन क्या अगर खुद की आंखों में देखूं तो इक सुकून नजर आएगी!
खुद की चेहरे को निहारूँ तो धीमी साँसों के बीच एक हल्की मुस्कान नज़र आएगी!
क्या मैं इतना एहसास कर पाउँगा कि मैंने 'जी' लिया है!
जो जिंदगी मुझे न् जाने कंहा से मिली, बिना किसी थकान के मेरी रूह सो पायेगी!
क्या उस पल हर सवाल मिट जाएगा,
जिंदगी के रंग में हर ख्वाब रंग जायेगी!
फिर कुछ और नही,
बस एक मुहब्बत रह जायेगी!
एक दिन सब खो जायेगा,
वो सवेरा न् जाने कैसा होगा,
क्या मेरी बन्द साँसों में कोई खुशबू रह जायेगी!
शायद ये जवाब आती - यक़ीनन!

           ~#aksh...

Sunday, 4 June 2017

लफ़्ज़

              कुछ कहूँ तो लब रुक जाते हैं..
           कुछ लिखूं तो 'लफ्ज़' थम जाते हैं..
            आदत में खुद की ढल सा गया हूँ
     न् जाने कब चलते चलते कदम रुक जाते हैं..
    सफर ये तन्हा था, या सफर में मैं तन्हा सा,
           यूँ कहूँ तो हर रात ढल जाते हैं,
     बिन मिले कई मुलाक़ात बदल जाते हैं..
         ऐसे न् जाने कितने बात रह जाते हैं,
        आँखों आँखों में बरसात रह जाते हैं..
     चुभती है जैसे ज़मीं को बारिश की कमी,
    इन सफर में कई अनकही शाम रह जाते हैं
           यादों में कई मुकाम रह जाते हैं,
      फिर खुद में हम थोड़े कम रह जाते हैं..
         कुछ लिखूं तो लफ्ज़ थम जाते हैं....
     
                       ~#aksh....


                       

यादें

जितना सहेजुं यादों को में अपनी किसी उम्र की, तो बस यादें रहने लगी है.. वो जो हमसफ़र था कहीं दूर खोता जा रहा है...