Thursday, 14 September 2017

ढूंढ लेगा वो

 आँखे तुम्हारी कुछ मुस्कान छिपाये बैठी है,
नज़रें झुका लो, तो भी ढूंढ लेगा वो!(कोई)

मासूम चेहरा कोई नाम छिपाये बैठी है,
इनको हटा लो, तो भी ढूंढ लेगा वो!(कोई)

ज़ुल्फें ये कोई शाम बनाये बैठी है,
थोड़ी लहरा लो, तो भी इनमें छांव ढूंढ लेगा वो!(कोई)

साँसें तेरी कोई 'ज़ाम' चढ़ाये बैठी है,
तुम कुछ पल न् भी लो, तो भी ढूंढ लेगा वो!(कोई)

___©aksh!

_©akshwrite.blogspot.com

Saturday, 29 July 2017

मज़ा आ गया..


ख़ल्क़ जाने क्या खूबसूरती ख्वाबों की,

जैसे उसने काज़ल लगाई, मज़ा आ गया...

शबनम झूम कर रात भर यूँ गिरती रही,
जैसे सावन की बारिश, मज़ा आ गया..

क़ातिलाना ज़माना जाने क्या आशिक़ी,
जैसे उसकी अंगड़ाई, मज़ा आ गया..

क़ैद कर न सकोगे फिज़ा इश्क़ की,
उसकी बे-परवाही भी ऐसी, मज़ा आ गया..

~#aksh..
(after a long time, titled a writing 'maza aa gaya'..)
ORIGINALLY POSTED ON FACEBOOK ON 1Oth FEB , 2017
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Original @Post - http://bit.ly/2uK4Whq
Profile - facebook.com/akshaykumarakky








                     

Monday, 24 July 2017

कुछ कहते हैं

चलो कुछ कहते हैं,

बेज़ुबान रहे हदों तक,
आज बयां करते हैं..
ख़ामोशी सी पल रही,

कोई रौशनी दिल में,

बेखौफ होकर जीना है अब
आँधियों में,
जिसे इम्तहां कहते हैं..
होकर कंही गुमशुदा,
तलाशा खुद को हर दफा,
मिट जाएँ तो अब गम नही,
खुद को अब निशाँ कहते हैं..
है वजूद से क्या रिश्ता मेरा,
मैं मेरा वज़ूद हूँ,
बस इतनी सी बात है,
    और कुछ हम कहाँ कहते हैं.. :०

~#aksh..


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MYSELF
CLICKED ON DSLR CANON
ON THE HILL
DONGARGARH

Tuesday, 20 June 2017

बारिश

                    ये शाम  ये सुबह कोई इशारा कर रहा..
                    बूंदें बारिश की छुकर गुज़रती है जैसे ,
                       लहरों को कोई किनारा कर  रहा ..
                          इक अरसे सुकून ढूंढा है मैंने,
                              कुछ बयाँ कर न पाऊं,
                           दिल ये कैसे गुजारा कर रहा ...
                         सावन की घटाएं, गहरी हवाएं 
                                 आती है जैसे..
                    मौसम की बारिश, बारिश की अदाएं
                                छाती है जैसे..
                 दिल की धड़कनो को मचलने का मन
                                दुबारा कर रहा..
                बिन कहे बिन सुने किसी की बातें,
                          नई उमंगो को छूने को,
                    मुझको ये बारिश बेसहारा कर रहा..
                  बूंदें बारिश की छूकर गुज़रती है जैसे,
                      लहरों को कोई किनारा कर रहा...

                                      #~aksh...


Rain AND Love
Source : Google

Thursday, 8 June 2017

एक दिन

एक दिन सब खो जायेगा.. वो सवेरा न् जाने कैसा होगा, दुनिया न् जाने कैसी होगी, हर कुछ बदल जायेगा, यक़ीनन!
तो उस दिन क्या अगर खुद की आंखों में देखूं तो इक सुकून नजर आएगी!
खुद की चेहरे को निहारूँ तो धीमी साँसों के बीच एक हल्की मुस्कान नज़र आएगी!
क्या मैं इतना एहसास कर पाउँगा कि मैंने 'जी' लिया है!
जो जिंदगी मुझे न् जाने कंहा से मिली, बिना किसी थकान के मेरी रूह सो पायेगी!
क्या उस पल हर सवाल मिट जाएगा,
जिंदगी के रंग में हर ख्वाब रंग जायेगी!
फिर कुछ और नही,
बस एक मुहब्बत रह जायेगी!
एक दिन सब खो जायेगा,
वो सवेरा न् जाने कैसा होगा,
क्या मेरी बन्द साँसों में कोई खुशबू रह जायेगी!
शायद ये जवाब आती - यक़ीनन!

           ~#aksh...

Sunday, 4 June 2017

लफ़्ज़

              कुछ कहूँ तो लब रुक जाते हैं..
           कुछ लिखूं तो 'लफ्ज़' थम जाते हैं..
            आदत में खुद की ढल सा गया हूँ
     न् जाने कब चलते चलते कदम रुक जाते हैं..
    सफर ये तन्हा था, या सफर में मैं तन्हा सा,
           यूँ कहूँ तो हर रात ढल जाते हैं,
     बिन मिले कई मुलाक़ात बदल जाते हैं..
         ऐसे न् जाने कितने बात रह जाते हैं,
        आँखों आँखों में बरसात रह जाते हैं..
     चुभती है जैसे ज़मीं को बारिश की कमी,
    इन सफर में कई अनकही शाम रह जाते हैं
           यादों में कई मुकाम रह जाते हैं,
      फिर खुद में हम थोड़े कम रह जाते हैं..
         कुछ लिखूं तो लफ्ज़ थम जाते हैं....
     
                       ~#aksh....


                       

Wednesday, 19 April 2017

अधूरा ये शाहिल..




                                ये सफ़र खूबसूरत है या मंज़िल,.
                              ये इंतज़ार आसान है या मुश्किल,.
                  ये इश्क़ अलग है मुझमें या तुझसे हुआ है शामिल,.
                        ये आदत कैसी है जो धड़कता है दिल,.
                                        ख़ुश हूँ तेरे संग,
                             ये तेरी जादू है या कोई महफ़िल,.
                                चलते चलते अब ये जाना है,
                         अधूरे लहर भी है और अधूरा ये शाहिल,.
                                            ~#aksh

           

यादें

जितना सहेजुं यादों को में अपनी किसी उम्र की, तो बस यादें रहने लगी है.. वो जो हमसफ़र था कहीं दूर खोता जा रहा है...