चलो कुछ कहते हैं,
बेज़ुबान रहे हदों तक,
आज बयां करते हैं..
ख़ामोशी सी पल रही,
कोई रौशनी दिल में,
बेखौफ होकर जीना है अब
आँधियों में,
जिसे इम्तहां कहते हैं..
होकर कंही गुमशुदा,
तलाशा खुद को हर दफा,
मिट जाएँ तो अब गम नही,
खुद को अब निशाँ कहते हैं..
है वजूद से क्या रिश्ता मेरा,
मैं मेरा वज़ूद हूँ,
बस इतनी सी बात है,
और कुछ हम कहाँ कहते हैं.. :०
~#aksh..
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| MYSELF CLICKED ON DSLR CANON ON THE HILL DONGARGARH |

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