Thursday, 8 June 2017

एक दिन

एक दिन सब खो जायेगा.. वो सवेरा न् जाने कैसा होगा, दुनिया न् जाने कैसी होगी, हर कुछ बदल जायेगा, यक़ीनन!
तो उस दिन क्या अगर खुद की आंखों में देखूं तो इक सुकून नजर आएगी!
खुद की चेहरे को निहारूँ तो धीमी साँसों के बीच एक हल्की मुस्कान नज़र आएगी!
क्या मैं इतना एहसास कर पाउँगा कि मैंने 'जी' लिया है!
जो जिंदगी मुझे न् जाने कंहा से मिली, बिना किसी थकान के मेरी रूह सो पायेगी!
क्या उस पल हर सवाल मिट जाएगा,
जिंदगी के रंग में हर ख्वाब रंग जायेगी!
फिर कुछ और नही,
बस एक मुहब्बत रह जायेगी!
एक दिन सब खो जायेगा,
वो सवेरा न् जाने कैसा होगा,
क्या मेरी बन्द साँसों में कोई खुशबू रह जायेगी!
शायद ये जवाब आती - यक़ीनन!

           ~#aksh...

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