पिछली बरसात मे बादल के तीखी आवाज से जो गलती से हाथ पकड़ा था तुमने,
कमान सी भौहें तेरी इसकदर झुकी,
कुछ यूँ कातिलाना कि दिल को खुरेद गयी,
जैसे बंजर रेगिस्तान मे एक मरहूम प्यासे को बारिश की हज़ारो बूँदें इक जान से भर जाती हैं,
वो अक्श तेरी रूह की जो मरहुमियत बनकर सारे शिकवों का कत्ल कर गयी,
कुछ ऐसी बरसात मे फिर भींगा दो मुझे,
कुछ ऐसे एहसान कुछ इस तरह फिर जता दो मुझे...
©#~aksh
(इन रोमांटिक मूड)
कमान सी भौहें तेरी इसकदर झुकी,
कुछ यूँ कातिलाना कि दिल को खुरेद गयी,
जैसे बंजर रेगिस्तान मे एक मरहूम प्यासे को बारिश की हज़ारो बूँदें इक जान से भर जाती हैं,
वो अक्श तेरी रूह की जो मरहुमियत बनकर सारे शिकवों का कत्ल कर गयी,
कुछ ऐसी बरसात मे फिर भींगा दो मुझे,
कुछ ऐसे एहसान कुछ इस तरह फिर जता दो मुझे...
©#~aksh
(इन रोमांटिक मूड)

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